नासमझी…

इश्क़ कुछ इस कदर हुआ उनसे
उनकी गलतियां अपनी लगने लगीं
उनकी खामियां अच्छी लगने लगीं
उनकी नासमझी की हद तो देखिये
वह हमें ही
कुसूरवार कहकर
दोषी करार कर
कैदी बनाकर
अनजानों की तरह
छोड़ चले

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आशा सेठ