आज रात फिर …

आज रात फिर
दरवाजे पर
तुम्हारी यादों
ने दस्तक दी
घंटों वे ठहरे रहे
की कब हम उन्हें
भीतर लें, बतियाएं
सारी रात
चारपाई से लिपटे
हमने उन्हें अनसूना किया
सारी उम्र
इन यादों ने
आंखें नम ही तो की हैं