रंगी हूँ तुझ में…

जैसे है पीला सूरज का नीला आकाश का हरा बरसात का सफ़ेद सर्दी का जैसे है भूरा धरती का नारंगी शूर का लाल प्रेम का काला झूठ का वैसे ही रंगी हूँ तुझ में सदा के लिए तेरे बिना मेरी पहचान क्या? तुझसे जुदा मेरा अस्तित्व क्या? ~~~~~ आशा सेठ

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ख्वाहिशें बेशुमार…

मत पूछो हमसे की दिल का हाल क्या है… क्या करे बेचारा इसकी ख्वाहिशें बेशुमार हैं… ~~~~~ आशा सेठ

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Kuch Vo Pal: Book Review by Asha Seth

Hindi poets such as Gulzar, Kabir, Harivansh Rai Bachchan, Javed Akhtar, etc. have always influenced my thoughts in poetry. Their works have always inspired me. Rarely have I come across debut works in Hindi poetry from contemporary writers. So when I came across ‘Kuch Vo Pal’ on Blogadda, it intrigued me. Naturally, I wanted to…

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