नासमझी…

इश्क़ कुछ इस कदर हुआ उनसेउनकी गलतियां अपनी लगने लगींउनकी खामियां अच्छी लगने लगींउनकी नासमझी की हद तो देखियेवह हमें हीकुसूरवार कहकरदोषी करार करकैदी बनाकरअनजानों की तरहछोड़ चले ~~~~~ आशा सेठ

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Late – MicroPoetry

maybe that’s why letters always arrived late weighed down by all the love and regrets * * * * * #badbookthiefpoetry Find a whole bunch of my pieces on Instagram. Just visit the link below. Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂

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4 am

you’re adrift barely breathing you’re sleeping but your ghosts are lurking although draped in slumber in your head you’re wide awake… For 4 am, is the hour to sire fresh dreams to leave behind all that couldn’t be… For 4 am, is a new bend those haunts need to rest the voices better wait they…

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रंगी हूँ तुझ में…

जैसे है पीला सूरज का नीला आकाश का हरा बरसात का सफ़ेद सर्दी का जैसे है भूरा धरती का नारंगी शूर का लाल प्रेम का काला झूठ का वैसे ही रंगी हूँ तुझ में सदा के लिए तेरे बिना मेरी पहचान क्या? तुझसे जुदा मेरा अस्तित्व क्या? ~~~~~ आशा सेठ

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ख्वाहिशें बेशुमार…

मत पूछो हमसे की दिल का हाल क्या है… क्या करे बेचारा इसकी ख्वाहिशें बेशुमार हैं… ~~~~~ आशा सेठ

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