सिलवटें

रेत की तरह ज़िंदगी हाथों से निकलती चली जाती है हम तो बस किस्से हैं दबे कहीं सिलवटों में इसकी

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पलटवार

यूँ बिन बताए आधी रात आनासब जान चुके हैंपरेशान हो चुके हैंअब शांत हो चुके हैंयूँ खिड़की से सीटियां मारनासब जान चुके हैंपरेशान हो चुके हैंअब हार चुके हैंवक़्त का खेल तो देखोकिस्मत पलटवार कर गयीअब जो जा चुकी हो तो सुनोख्यालों मेंयूँ बिन बताए न आया करोभूला चुका हूँ मैंहार चुका हूँ मैंयूँ दिलोदिमाग…

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तन्हाई

तन्हाइयों की शिकायत करें भी तो कैसे इन्होंने ता उम्र अपनों की तरह साथ निभाया है

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दिलासा

शाम को जबपंछी घर लौटते हैंउन्हें देख दिल कोदिलासा दे देते हैंमेरा आंगन न सहीकिसीकी तो बगियाआज रोशन हुई

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सांसें

उन खामोशियों पे दिल हारती चली गयी… शब्द क्या कह पाते जो तुम्हारी सांसें बयाँ कर गयीं…

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ऐ जिंदगी…

पल दो पल ठहरकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी मीठी शरारतों में घुलना बाकी है अभी… पल दो पल पलटकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी नमकीन मस्तियों को चखना बाकी है अभी… पल दो पल मुस्कुराकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी हसीन मधोशियों में बिखरना बाकी है अभी…

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आज रात फिर …

आज रात फिरदरवाजे परतुम्हारी यादोंने दस्तक दीघंटों वे ठहरे रहेकी कब हम उन्हेंभीतर लें, बतियाएंसारी रातचारपाई से लिपटेहमने उन्हें अनसूना कियासारी उम्रइन यादों नेआंखें नम ही तो की हैं

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कभी तो ऐसा हो …

कभी तो ऐसा होमैं कुछ न कहूँऔर तुम सुन लोमैं नज़रें चुराऊँऔर तुम देख लोमैं उम्मीदें छुपाऊँऔर तुम जान लोमैं हसरतें मिटाऊंऔर तुम पढ़ लोकभी तो ऐसा होमैं खुदको रोकूंऔर तुम पहचान लोमैं कतरा बिखरुंऔर तुम थाम लो

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नासमझी…

इश्क़ कुछ इस कदर हुआ उनसेउनकी गलतियां अपनी लगने लगींउनकी खामियां अच्छी लगने लगींउनकी नासमझी की हद तो देखियेवह हमें हीदोषी करार करअनजानों की तरहछोड़ चले ~~~~~ आशा सेठ

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It’s a shame…

It’s a shame

that i want more of you

always more

so much more

like a hungry wolf

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4 am

you’re adrift barely breathing you’re sleeping but your ghosts are lurking although draped in slumber in your head you’re wide awake… For 4 am, is the hour to sire fresh dreams to leave behind all that couldn’t be… For 4 am, is a new bend those haunts need to rest the voices better wait they…

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Love – Micropoetry

like a mad dog this heart went on chasing the trails of love * * * * * #badbookthiefpoetry For more of my poetry, Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂 ~~~~~  Youtube| Twitter| Instagram| Facebook| Tumblr | Pinterest

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रंगी हूँ तुझ में…

जैसे है पीला सूरज का नीला आकाश का हरा बरसात का सफ़ेद सर्दी का जैसे है भूरा धरती का नारंगी शूर का लाल प्रेम का काला झूठ का वैसे ही रंगी हूँ तुझ में सदा के लिए तेरे बिना मेरी पहचान क्या? तुझसे जुदा मेरा अस्तित्व क्या? ~~~~~ आशा सेठ

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Like a river…

I live off your breaths in all those moments when breathing is hard to do I walk in your steps in all those lanes where direction seems obscure I create life from your leftovers when my muse refuses to stop by I look at myself in your eyes when mirrors turn blind You are like…

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Drunk – Micropoetry

evenings were drunk on love that didn’t exist by dawn * * * * * #badbookthiefpoetry   Follow me on Instagram and Pinterest for my poetry. Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂 ~~~~~ © Asha Seth Never miss a post! Subscribe Now: Youtube| Twitter| Instagram| Facebook| Tumblr | Pinterest

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ख्वाहिशें बेशुमार…

मत पूछो हमसे की दिल का हाल क्या है… क्या करे बेचारा इसकी ख्वाहिशें बेशुमार हैं… ~~~~~ आशा सेठ

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the withering anchor

the tide has turned I am lost in its depths there’s nothing saving me from the gnawing weeds filling my lungs but his words become my anchor against raging storms they hold me down from going astray all I need to do is hold on but I am slipping from their grip and he doesn’t…

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तेरी यादें…

किस गली जाकर छुपूँ की तेरी यादें पीछा करना छोड़ दें हर नुक्कड़ पर इनका बसेरा है हर चौराह इनका मेला भरा रात ठहरूं चाहे जहाँ सुबह इन्ही की बाहों में होती है सोचता हूँ, मैं हूँ यहीं या बस इनकी सिलवटों में गुम कहीं तेरे जाने से जो गम न हुआ वह इनकी साथ…

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Fire – Micropoetry

* * * * * there was no dousing that fire, the night was a long one * * * * * #badbookthiefpoetry Follow me on Instagram and Pinterest for my poetry. Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂 ~~~~~ © Asha Seth Never miss a post! Subscribe Now: Youtube| Twitter| Instagram| Facebook| Tumblr | Pinterest

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Uproar – Micropoetry

When the last of the winds have stopped howling even a dead leaf’s stir will cause an uproar Follow @badbookthief on Instagram for more micropoetry. Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂 ~~~~~ © Asha Seth Never miss a post! Subscribe Now: Youtube| Twitter| Instagram| Facebook| Tumblr

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Ruin – Micropoetry

And baby, here’s why you couldn’t ruin me because even before we met a thousand fires had burnt me a thousand seas had drowned me Follow @badbookthief on Instagram for more micropoetry. Happy writing till we meet next. Until then, carpe diem! 🙂 ~~~~~ © Asha Seth Stay in touch. Subscribe Now: Youtube| Twitter| Instagram| Facebook| Tumblr

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