किस गली जाकर छुपूँ की तेरी यादें पीछा करना छोड़ दें हर नुक्कड़ पर इनका बसेरा है हर चौराह इनका मेला भरा रात ठहरूं चाहे जहाँ सुबह इन्ही की बाहों में होती है सोचता हूँ, मैं हूँ यहीं या बस इनकी सिलवटों में गुम कहीं तेरे जाने से जो गम न हुआ वह इनकी साथ... Continue Reading →

धुआं धुआं हुआ उस गली का झोंका जो कभी गुलाब सा महेकता था खोया हुआ है अब उस देश का सूरज आज न जाने कहाँ ढले कभी दर्जनों कोयलें एक साथ उड़ान भर्ती थीं जहाँ आज एक कौवे तक को नज़र तरसती है चांदनी रातों में उस शहर की चौबारें घुँघरुओं की बौछार से चहकती... Continue Reading →

सुबह जब घर से निकलता उसका चेहरा दिल में लिए चलता रास्ते भर यही सोचता कब तक ऐसे चलेगा फटे पुराने चप्पल रास्तों से लड़ते इसी तरह रोज़ गुज़ारे की तलाश में दिन से रात रात से दिन करता शाम को जब घर लौटता वो बैठी रहती पैर पसारे मेरा इंतज़ार करते मुझे देख मुस्कुराती... Continue Reading →

मत कहो यह किस्मत की बात है... जहां बारातों में हज़ारों के निवाले कूड़े दान को खिलाये जा रहे हैं पर एक पिता अपने परिवार को दो वक़्त की रोटी तक को खून बहा रहा है मत कहो यह किस्मत की बात है... की बंद घरों में दीवारों पे लटकी तसवीरें घंटो ऐसी का हवा... Continue Reading →

कभी जो…

कभी जो नज़रें मिलीं पलकें झुका न लेना कभी जो मेरी यादों ने दस्तक दी उन्हें ठुकरा न देना उम्मीद लिए देहलीज़ पर खड़ा हूँ इस इंतज़ार में कब मेरी गली से गुज़रोगे कभी जो मेरी आवाज़ सुनो अजनबी कहकर मुँह फेर न लेना ~~~~~ आशा सेठ

घर

दीवारों की दरारों में छुपी ज़र्द यादें पास जाकर देखा कभी मेरा बचपन सतह पर तैरता कभी दादी का बुढ़ापा कनखियों से झाँकता खिड़कियों के पार से सन्नाटे ताकते कभी होली में रंगे माँ-बाबा की झलक तो कभी बिदाई में सजी अन्नू का अक्स खाली कमरों में गूंजते हँसी के पटाखे कभी पापा के ठहाके... Continue Reading →

कल…

चलते चलते कदम नहीं थकते ठहर जाने से थकते हैं यह सोचकर परेशान नहीं दिल की कल की सुबह आज सी नहीं होगी पर इस सोच में डूबा रेहता है की आज की शाम कल सी हुई तोह क्या डर इस बात का नहीं की कल अपने मुँह मोड़ लें फिक्र इस बात की होती... Continue Reading →

बसेरा…

चुपके से दबे पाओं आकर मेरे दिल में तुम्हारी बातें कुछ ऐसे बसेरा कर गयीं की आज मुझसे ज़्यादा कहीं तुम हो झलकती उन आइनों से जिनमें मैं कभी खुदको तलाशता था ~~~~~ आशा सेठ

सुनहरी यादें…

सूरज की लौटती किरणों के संग हताश तन्हाईयाँ वापस लौट गयीं सुनहरी यादों से लिपटी यह शाम एक बार फिर हमें ज़िंदादिल कर गयी... ~~~~~ आशा सेठ

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